National Archives of India "‘भारत की विश्व विरासत: राजस्थान’"

‘भारत की विश्व विरासत: राजस्थान’
भारत की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों में राजस्थान का विशेष स्थान है। यहाँ पर विकसित ऐतिहासिक- परंपराएं, भव्य दुर्ग-प्रासाद, अद्वितीय नगर योजना, लोक- कलाएँ एवं अमर वीर गाथाएँ मानवता की वैश्विक धरोहर को समृद्ध करती रही हैं । ‘भारत की विश्व विरासत: राजस्थान’ प्रदर्शनी राज्य की उसी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, गौरवशाली विरासत एवं ऐतिहासिक चेतना को प्रस्तुत करती है, जिसने सदियों से भारत की राजनीति, समाज एवं संस्कृति को प्रभावित किया है । इस प्रदर्शनी में न केवल स्थापत्य विरासत को दिखाया गया है बल्कि संघर्ष, बलिदान और संस्कृति के उन तत्वों को प्रदर्शित किया गया है जिनसे राजस्थान की पहचान दीर्घावधि में निर्मित हुई है।
प्रदर्शनी में उन ऐतिहासिक विभूतियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है, जिनकी गाथाएँ आज भी प्रेरणा का स्रोत है। महाराणा प्रताप का अदम्य साहस और स्वाभिमान, राणा कुम्भा की स्थापत्य दृष्टि एवं दूरदर्शी नेतृत्व, रानी पद्मिनी की अस्मिता और आत्मगौरव तथा मीराबाई की भक्ति परंपरा एवं अध्यात्म, इस प्रदर्शनी के मूल तत्व हैं।
प्रदर्शनी में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत सूची में शामिल राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग प्रमुख रूप से प्रदर्शित किए गए हैं, जिसमें चित्तौड़गढ़ दुर्ग, कुंभलगढ़ दुर्ग, रणथंभौर दुर्ग, आमेर दुर्ग, जैसलमेर दुर्ग एवं गागरोन दुर्ग शामिल हैं। ये दुर्ग राजपूत-वीरता, सामरिक दक्षता और स्थापत्य नवाचार के अद्वितीय उदाहरण है। दुर्ग की अभेद्य प्राचीरें और प्राकृतिक भू-आकृति के अनुरूप निर्मित संरचनायें उस काल की उन्नत रक्षा व्यवस्था और तकनीकी कौशल को साकार करती है।
इसी क्रम में जंतर-मंतर, भारतीय वैज्ञानिक परम्परा और खगोल विज्ञान की उत्कृष्ट उपलब्धि का प्रतीक है, जबकि जयपुर की ऐतिहासिक सुव्यवस्थित नगर-योजना, स्थापत्य और सांस्कृतिक जीवंतता का अनुपम उदाहरण है। उदयपुर के झील-प्रासाद, जोधपुर और बीकानेर की विशिष्ट स्थापत्य शैली, बूँदी और झालावाड़ की कलात्मक विरासत, ये सभी राजस्थान की बहुआयामी पहचान को सशक्त बनातें हैं।
इस प्रदर्शनी में राजस्थान के विविध सांस्कृतिक अंचलों-ढूंढाड़, मारवाड़, मेवाड़, हाड़ौती की विशिष्ट जीवनशैली, वेशभूषा, लोक संगीत, चित्रकला और स्थापत्य सौन्दर्य को दिखाने का प्रयास किया गया है। इन क्षेत्रों में निर्मित दुर्ग, महल, मन्दिर और नगर-योजनायें केवल स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण ही नहीं है अपितु सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना, सामरिक सूझ-बूझ और कलात्मक दृष्टि की अभिव्यक्ति हैं।
यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय अभिलेखागार के ऐतिहासिक स्त्रोतों एवं दस्तावेजों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध विरासत को प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करती है। भारत सरकार द्वारा सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार-प्रसार के जो सतत प्रयास किये जा रहें हैं, यह प्रदर्शनी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


