उपचारात्मक संरक्षण

उपचारात्मक संरक्षण

 

अभिलेखों के संरक्षण के उपचारात्माक पहलू में स्थाकयी महत्व् के भुरभुरे, नाजुक और अम्लीकय अभिलेखों को ठीक करना शामिल है जिससे कि वि-अम्ली्करण नामक प्रक्रिया का प्रयोग करके इस विभाग में रखी गई अभिलेखीय विरासत की क्षति को कम किया जा सके। इस प्रक्रिया में दस्ताावेजों में मौजूद अम्लता को समाप्ता करने के लिए कैल्शियम हाइड्रौक्सादइड और कैल्शियम बाइकार्बोनेट जैसे अल्क लाइन रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इसे अक्वेपयस डी एसिडिफिकेशन तकनीक कहा जाता है तथा अम्लकता हटाने और अभिलेखों को दीर्घायु करने के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार में व्यापक रूप से इसका प्रयोग किया जाता है ताकि ऐतिहासिक महत्व के दस्ताीवेज भावी पीढि़यों के लिए सुरक्षित रखे जा सकें। घुलनशील स्यायही से लिखे गए दस्तातवेजों से नॉन एक्वेतयस प्रणाली प्रयुक्त् करके वि-अम्लीाकृत किया जाता है।